आर्य समाज मंदिर प्रांगण में किया यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन

महेंद्रगढ़,8 जून (परमजीत सिंह/शैलेन्द्र सिंह)।
आर्य समाज मन्दिर महेंद्रगढ़ के प्रांगण में साप्ताहिक यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन वैदिक संस्कृति को विश्व भर में गुंजायमान करने,विश्व कल्याण, पर्यावरण शुद्धि,कोरोना रोग बचाव,शोक निवारण हेतु ,  वेद मंत्रोच्चारण से विशेष आहुतियों द्वारा विधिवत,     किया गया। जिसकी अध्यक्षता आर्य समाज के प्रधान पंडित भूपेंद्र सिंह आर्य ने की वहीं समाज के मंत्री डॉ विक्रांत डागर ने यजमान की भूमिका निभाई तथा यज्ञ ब्रह्मा के स्थान पर मास्टर रघुनाथ सिंह सिसोठ रहे।
भूपेन्द्र सिंह आर्य ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा की यज्ञ हमे त्याग,तप, सेवा और प्रेम पथ पर चलने व राग, इर्ष्या, द्वेष,घमंड व  द्वंद्वों को अग्नि में जलाने की प्रेरणा देता हैं।
यज्ञ से ईश्वर का सामीप्य  प्राप्त होता है, देवत्व के गुण विकसित होते हैं और मंत्रों के चिंतन, मनन, वाचन से वेदो की रक्षा व हमारे संस्कारों का पोषण होता है। परोपकार की भावना विकसित होती है।
डॉ विक्रांत डागर ने बताया कि ईश्वर एक है, सकल जगत का उत्पत्ति करता, स्थित करता, और प्रलय करता  वही है। त्रिविद्ध रूपों का स्मरण करने के लिए हमें उसी की उपासना करनी योग्य है। वे दो, तीन, चार नहीं है। ईश्वर के गुणवाची अनेकों नाम है। वह निराकार है, यही एक ईश्वर जगत का उत्पादक होने से ब्रह्मा, पालक होने से विष्णु ,और कल्याणकारी होने से शिव नाम से जाना जाता है । इस अवसर पर डॉ सुरेंद्र कुमार आर्य, बृहस्पति शास्त्री,बीर सिंह मेघनवास, महेन्द्र दीवान, देवांशआर्य, मिशिका आर्य, सरोज,  आदि ने आहुति दी।

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