हकेवि में तीन दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला की हुई शुरुआत

महेंद्रगढ़,17 जून (परमजीत सिंह)।
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शोध एवं विकास प्रकोष्ठ  के सहयोग से ‘फसल सुधार हेतु प्रिसीजन जीनोम एडिटिंग‘ विषय पर तीन दिवसीय व्यावहारिक कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार एवं समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को जीनोम एडिटिंग के उभरते क्षेत्र में आवश्यक कौशल एवं ज्ञान प्रदान करना है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. नीलम सांगवान ने अपने संबोधन में जीनोम एडिटिंग तकनीकों की कृषि में सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कैसे इन तकनीकों से वैज्ञानिक ऐसे फसल किस्में विकसित कर सकते हैं जो पर्यावरणीय तनावों, कीटों एवं रोगों के प्रति अधिक सहनशील हों तथा पोषण गुणवत्ता में भी सुधार हो। कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. रूपेश देशमुख ने ‘मल्टीप्लेक्स जीनोम एडिटिंग‘ विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने सीआरआईएसपीआर/सीएएस9 प्रणाली सहित अन्य नई जीनोम एडिटिंग तकनीकों और इनके कृषि उत्पादकता एवं स्थायित्व में योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। 
कार्यक्रम में मंच का संचालन गीतांजलि जोशी ने किया। कार्यशाला में 40 विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की। कार्यशाला में शोधार्थी बादल महाकालकर, पवन कुमार एवं सुश्री प्रगति सिंह ने लीआरएनए डिजाइन, वेक्टर चयन एवं मीडिया तैयारी जैसे जीनोम एडिटिंग के तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित सत्र संचालित किए। इन सत्रों ने प्रतिभागियों को जीनोम एडिटिंग प्रयोगों की योजना बनाने एवं उन्हें सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान किया।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में सत्र में डॉ. स्रीजा एस. एस. ने स्नैपजीन सॉफ्टवेयर द्वारा ’इन सिलिको कंस्ट्रक्ट प्रिपरेशन’ पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को जीनोम एडिटिंग परियोजनाओं की डिज़ाइनिंग एवं विज़ुअलाइजेशन में बायोइन्फॉर्मेटिक्स टूल्स के महत्त्व से अवगत कराया। कार्यशाला के आयोजन में आकाश मौर्य एवं आशुतोष वर्मा ने सक्रिय भूमिका निभाई।
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