हकेवि ने जेएनवी करीरा में जैव प्रौद्योगिकी पर व्यवहारिक प्रशिक्षण का किया आयोजन

वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा देना लक्ष्य
महेंद्रगढ़ 4 अगस्त (परमजीत सिंह/शैलेन्द्र सिंह)।
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा पीएम श्री योजना के अंतर्गत अपनाए गए विद्यालय जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी), करीरा, जिला महेंद्रगढ़ में एक दिवसीय जैव प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। यह प्रशिक्षण कार्यशाला हकेवि आउटरीच पहल ‘ग्रामोदय सहस्त्र विद्या दीपः‘ के अंतर्गत आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र के 1000 ग्रामीण विद्यार्थियों को व्यावहारिक विज्ञान से जोड़ना है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने अपने संदेश में विद्यार्थियों से उत्कृष्टता की ओर अग्रसर होने, पर्यावरण के प्रति जागरूक बनने और विकसित भारत की संकल्पना में योगदान देने का आह्वान किया।
प्रो. रूपेश देशमुख ने बताया कि जेएनवी, करीरा में आयोजित कार्यशाला में 25 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागी विद्यार्थियों ने पौधों के ऊतकों से डीएनए निकालने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया। उन्होंने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण विद्यार्थियों को कक्षा और पुस्तकों से आगे जाकर वास्तविक वैज्ञानिक प्रयोग करने का अवसर प्रदान करने, जिज्ञासा जागृत करने और जैव प्रौद्योगिकी की समझ विकसित करने में मदद प्रदान करते हैं। प्रो. देशमुख ने प्रतिभागी विद्यार्थियों को ‘जीवन की रूपरेखा‘ पर व्याख्यान देते हुए बताया कि जैव विविधता एवं विकास में जीन की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को जैव प्रौद्योगिकी के नैतिक और सतत उपयोग पर बल दिया जिससे समाज और पर्यावरण का कल्याण सुनिश्चित हो सके।
कार्यशाला के आयोजन जेएनवी करीरा के उप-प्रधानाचार्य श्री धर्मेंद्र आर्य के नेतृत्व में हुआ, जिसमें विद्यालय की शिक्षक श्रीमती सरला यादव एवं श्री अमित शर्मा ने समन्वयक की भूमिका निभाई। इस व्यवहारिक प्रशिक्षण को सीयूएच के शोधार्थी बादल महाकालकर, आकाश मौर्य और सुश्री गीतांजलि जोशी ने सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने विद्यार्थियों को डीएनए निष्कर्षण की प्रत्येक प्रक्रिया से अवगत कराया और प्रयोगशाला उपकरणों का व्यावहारिक ज्ञान दिया।
कार्यशाला में विश्वविद्यालय की मोबाइल लैब को विद्यालय परिसर में लाकर एक साधारण कक्षा को एक दिन के लिए जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला में परिवर्तित कर दिया गया, जिससे यह अनुभव और भी अधिक उपयोगी बन गया। यह अभिनव पहल सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक विज्ञान के बीच की दूरी को पाटने का एक प्रभावी उदाहरण है। यह पहल विद्यार्थियो में विज्ञान की मूल अवधारणाओं की समझ को सुदृढ़ करने के साथ-साथ उन्हें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित क्षेत्रों में भविष्य की शिक्षा और करियर के लिए प्रेरित कर रही है, जो विश्वविद्यालय द्वारा किया गया एक दूरदर्शी और प्रेरक प्रयास है।

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