महेंद्रगढ़ ,24 अगस्त (परमजीत सिंह/शैलेन्द्र सिंह)।
आर्य समाज महेंद्रगढ़ की पावन यज्ञशाला मे महर्षि दयानंद सरस्वती जी की शिक्षाओं और वैदिक धर्म, संस्कृति और संस्कारों के प्रचार- प्रसार हेतू आज साप्ताहिक यज्ञ एवं सत्संग काआयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता वेद प्रचार मंडल जिला महेंद्रगढ़ के प्रधान डॉक्टर प्रेमराज आर्य ने की आर्य समाज के प्रधान एवं वैदिक पुरोहित पंडित भूपेंद्र सिंह आर्य ने यज्ञ करवाया, यजमान वीर सिंह मेघनवास रहे।
यज्ञ के ब्रह्मा डॉक्टर विक्रांत डागर ने अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष, और अभिनिवेश” पाँच क्लेश जो मनुष्य को दुख देते रहते हैं पर प्रकाश डालते हुए कहा की अविद्या इन सभी क्लेशों का मूल कारण है।मनुष्य का लक्ष्य इन क्लेशों से मुक्ति पाना है, ताकि दुख से छुटकारा पाया जा सके और शांति प्राप्त की जा सके।
पंडित भूपेंद्र आर्य ने बताया कि जो व्यक्ति यज्ञ से शुद्ध किये हुए अन्न, जल और पवन आदि ‘पदार्थों का उपभोग करते हैं, वे निरोग होकर बुद्धि, बल, आरोग्य और दीर्घायु वाले होते हैं।
अग्नि में पदार्थ को डालने से उसकी शक्ति क्षेत्रफल और, गुणात्मक दृष्टि से हजारों गुणा बढ़ जाती है।
यज्ञ पद्धति पूर्णतःवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें आडम्बर, ढोंग, अवैज्ञानिक व तर्क विहीन बातों का कोई स्थान नहीं है।
डॉक्टर प्रेम राज आर्य ने बताया कि पर्यावरण को सन्तुलित रखने, जलवायु को शुद्ध करने तथा ग्लोबल वार्मिंग को कम करने का एकमात्र माध्यम यज्ञ है।
इस अवसर पर उप प्रधान वीर सिंह मेंघनवास, रानी आर्या, डॉक्टर आनंद कुमार, सूबेदार मेजर दलीप सिंह, महेंद्र दीवान,आस्था आर्या,सक्षम, सुनील शास्त्री, किरोड़ी लाल आर्य आदि ने यज्ञ में आहुति दी।
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