हकेवि में विभाजन की विभिषिका स्मृति दिवस पर हुआ विशेष कार्यक्रम आयोजित

विभाजन का दर्द झेलने वाले परिवार के सदस्य कैप्टन सतविंद्र सिंह ने बयां की कहानी

महेंद्रगढ़ 14 अगस्त (परमजीत सिंह/शैलेन्द्र सिंह)।

विभाजन का दर्द उन लोगों के लिए सदैव ही असहनीय है जो कहीं न कहीं इससे जुड़ें हैं। 15 अगस्त 1947 को देश आाजाद हुआ और इसी के साथ इसने विभाजन का वह दर्द झेला जोकि असहनीय है। आज हम विभाजन की जिन तस्वीरों को देखते हैं, इनमें दिखने वाला मंजर बेहद भयावह नजर आता है और हालात उससे कई गुणा अधिक वीभत्स थे। आज के दिन इस दर्द को याद करने के पीछे की एक ही वजह है कि ऐसे समय की कभी भी पुनरावृत्ति ना हो। यह विचार हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने गुरुवार को विभाजन की विभिषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस आयोजन में वक्ता के रूप में नारनौल निवासी कैप्टन सतविंद्र सिंह ने भी उनके परिवार द्वारा झेले गए विभाजन के दर्द को बयां किया।
विश्वविद्यालय के इतिहास एवं पुरातत्त्व विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत में विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र परमार ने विषय परिचय प्रस्तुत किया और अखंड भारत के विभाजन से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक पक्षों को प्रतिभागियों के समक्ष रखा। आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित कैप्टन सतविंद्र सिंह की आपबीती सुनकर सभी की आँखें नम हो गई। उन्होंने बताया कि वे वर्तमान में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित मीरपुर से विस्थापित होकर भारत आए थे और इस दौरान उनके परिवार व अन्य साथ चले लोगों ने कई अपनों को खो दिया। उन्होंने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के लिए विभाग व विश्वविद्यालय कुलपति के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी ने उस दर्द को सीधे ही महसूस नहीं किया लेकिन पूर्वजों से उन किस्सों को जानकर विभाजन और उसके दर्द को न सिर्फ समझा जा सकता है बल्कि भविष्य में ऐसे किसी दर्द से बचने का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
आयोजन में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने मुख्य वक्ता कैप्टन सतविंद्र सिंह ने विचारों को मार्मिक बताते हुए कहा कि उनके परिवार ने भी ऐसा ही दर्द झेला है। कुलपति बोले कि विभाजन का वह दर्द असहनीय और अविस्मरणीय है। आज आवश्यकता है कि हम अपने जहन में उसे जिंदा रखें और भविष्य में ऐसा कुछ ना हो, उसके लिए तैयारी करें। कुलपति ने विद्यार्थियों को इस विषय पर अध्ययन व शोध के लिए भी प्रेरित किया। आयोजन में मंच का संचालन इतिहास एवं पुरातत्त्व विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अभिरंजन कुमार ने किया। कार्यक्रम के अंत में सहआचार्य डॉ. कैलाश चंद गुर्जर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी विमोचन विश्वविद्यालय कुलपति व मुख्य वक्ता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान पीठ की अधिष्ठाता प्रो. पायल कंवर चंदेल, प्रो. राजीव कुमार सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. रेनु यादव, डॉ. रवि प्रताप पांडेय, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. के.आर. पलसानिया, डॉ. कुलभूषण मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, विद्यार्थी व शोधार्थी उपस्थित रहे।

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